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क्‍लोनिंग (Cloning)

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  क्‍लोनिंग (Cloning) क्‍लोन से अभिप्राय केवल एक जनक (माता अथवा पिता) से प्राप्‍त प्रतिलिपि से है। ‘क्‍लोन’ शब्‍द का अभिप्राय मात्र जीवंत प्राणियों के संदर्भ में किया जाता है क्‍योकि मृदु-पेय की कांच की बोतलें यद्यपि पूर्णत: समान होती हैं फिर भी क्‍लोन नहीं हैं। अपनी समान आनुवांशिक संरचना के कारण यह बिल्‍कुल भेद नहीं दर्शाते। प्रकृति में वे जीव जैसे सूक्ष्‍मजीव व पादप जिनमें गैर लैंगिक (Asexual) जनन होता है, क्‍लोन उत्‍पन्‍न करते हैं, इससे प्राय: ‘ नाभिकीय स्‍थानान्‍तरण तकनीक’ का प्रयोग किया जाता है। क्‍लोन शब्‍द सर्वप्रथम   J.B.S. हाल्‍डन द्वारा प्रयुक्‍त किया गया था। विश्‍व में क्‍लोन बहुतायत से विद्यमान है। उदाहरणर्थ एक युग्‍मज का समरूप जुड़वा संतानें क्‍लोन ही तो होती हैं। वे अपनी मां के गर्भाशय में एक कोशिका के रूप में विकसित होना शुरू करते हैं। निषेचित युगमज दो कोशिका में विभाजित होता है व प्रत्‍येक कोशिका परिवर्धित होकर समान आनुवंशिक लक्षणों के साथ जुड़वा संतान बनाते हैं। विश्‍व की प्रसिद्ध भेड़ ‘डॉली’ (1996) का एक क्‍लोन रॉसलिन इन्‍स्‍टीट्यूट एडिनबर्...

निमोनिया (Pneumonia) क्‍या है?

  निमोनिया ( Pneumonia ) फेफड़ों की एक या दोनों थैलियों में जलन पैदा करने वाला संक्रमण. इसमें थैलियों में पानी भी भर सकता है। निमोनिया में , वायु की थैलियों में द्रव या मवाद भर सकता है. संक्रमण सभी के लिए जानलेवा हो सकता है , लेकिन शिशुओं , बच्चों और 65 वर्ष से अधिक उम्र वाले लोगों को अधिक प्रभावित करता है। लक्षणों में बलगम या मवाद वाली खांसी , बुखार , ठंड लगना और सांस लेने में कठिनाई शामिल हैं। एंटीबायोटिक निमोनिया के कई प्रकारों को ठीक कर सकते हैं. निमोनिया के कुछ प्रकारों की रोकथाम टीकों से हो सकती है। निमोनिया होने के कुछ लक्षण:- दर्द के प्रकार:   सीने में तीक्ष्ण पूरे शरीर में:   बुखार , अच्छा महसूस न करना , चिपचिपी त्वचा , ठंड लगना , थकान , पसीना आना , भूख न लगना , या शरीर में पानी की कमी सांस संबंधी तंत्र:   तेज़ी से सांस लेना , सांस फूलना , सांस लेने में घरघराहट की आवाज़ आना , या हल्की सांस यह होना भी आम है:   खांसी होना या दिल की तेज़ धड़कन   हमारे शरीर में सांस लेने के अंग होते हैं फेफड़े ( Lungs) । फेफड़े स्पंज जैसे अंग होते है...

फेफड़ों (सीने) में संक्रमण (chest infection)

सीने में संक्रमण (chest infection)    सीने में संक्रमण (chest infection) मुख्य रूप से पतझड़ (Autumn) और ठंड (winter) के दौरान या ज़ुकाम (cold) या फ्लू (flu) के बाद होना बहुत सामान्य है। हालांकि बहुत से संक्रमण हल्के होते हैं और ख़ुद ठीक हो जाते हैं, कुछ मामले बहुत गम्भीर और जीवन के लिए घातक हो सकते हैं। सीने में संक्रमण (chest infection) के मुख्य लक्षण ये हैं : सीने में बलगम (a chesty cough) साँस लेने में समस्या (breathing difficulty) सीने में दर्द (chest pain) सिरदर्द (headache) और बुखार का होना भी सामान्य है। सीने में संक्रमण के प्रकार (type of chest infection) सीने में संक्रमण दो प्रकार के होते हैं: एक्यूट ब्रोंकाइटिस (acute bronchitis) निमोनिया (pneumonia) एक्यूट का अर्थ होता है कि संक्रमण कम समय तक रहता है। एक्यूट ब्रोंकाइटिस (acute bronchitis) और निमोनिया (pneumonia) के लक्षण समान होते हैं लेकिन निमोनिया के लक्षण अक्सर अधिक गम्भीर हो सकते हैं और मेडिकल सहायता की ज़रूरत पड़ सकती है। सीने में संक्रमण का इलाज (treating chest infection) ब्रोंकाइटिस का दौरा आमतौर पर 7 से 10 दिनो...

स्‍टेम सेल (Stem Cell)

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स्‍टेम सेल (Stem Cell) स्‍टेम सेल वे जैविक कोशिकाएँ होती हैं, जो लगातार विभाजित व विभेदित होकर शरीर को अन्‍य किसी भी कोशिका या ऊतक में बदलने की क्षमता रखती है। इन कोशिकाओं को शरीर के विभिन्‍न अंगों व ऊतकों की मरम्‍मत के लिए काम में लाया जा सकता है।       इस पद्धति की शुरूआत 60 के दशक में हुई थी। टोरंटों विश्‍वविद्यालय के अर्नेस्‍ट ए मेक्‍युलाक व जेम्‍स इटिल ने सबसे पहले सोचा इस क्षेत्र में काम करना शुरू किया था। विभिन्‍न स्‍त्रोतों से निम्‍न 04 प्रकार की स्‍टेम सेल्‍स प्राप्‍त किये जा सकते है। 1. टोटीपोटेंट स्‍टेम सेल – ये स्‍टेम सेल्‍स सभी प्रकार की कोशिकाओं व ऊतक में विभेदित होने की क्षमता रखती है। निषे‍चित अंडा एक प्रकार की टोटीपोटेंट कोशिका है। 2. प्‍लूरीपोटेंट स्‍टेम सेल – ये कोशिकाएँ प्‍लेसेंटल या टोटीपोटेंट का कोशिकाओं के अलावा किसी भी प्रकार की कोशिकाएँ बनती है। 3. मल्‍टीपोटेंट स्‍टेम सेल – ये कोशिकाएँ कुछ विशेष प्रकार के ऊतकों व कोशिकाओं में भी विभेदित हो सकती है, जैसे अस्थिमज्‍जा कोशिकाओं से प्राप्‍त हीमोपोइटिक स्‍टेम सेल केवल ल...

घर्षण बल (Friction Force)

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घर्षण बल (Friction Force) Ø    कोई वस्‍तु जब किसी दूसरी वस्‍तु की सतह पर फिसलती या लुढ़कती है अथवा ऐसा करने का प्रयास करती है तो उनके मध्‍य होने वाली सापेक्षिक गति का विरोध करने वाले बल को घर्षण बल कहते हैं। यह एक संपर्क बल है जो संपर्क में आई सतहों के बीच गति की दिशा के विरूद्ध दिशा में लगता है। इसकी दिशा सदैव वस्‍तु की आपेक्षिक गति की दिशा के विपरीत होती है। वास्‍तव में जब एक वस्‍तु का तल किसी अन्‍य वस्‍तु के तल पर फिसलता है, तो प्रत्‍येक वस्‍तु दूसरी वस्‍तु पर घर्षण बल लगाती है। जो कि वस्‍तुओ के संपर्क-तलों के समांतर होता है। घर्षण बल के प्रकार :- 1.     स्‍थैतिक घर्षण बल (Static Frictional Force) – जब एक वस्‍तु को दूसरी वस्‍तु के तल पर चलाने का प्रयास किया जाता है तो गति की अवस्‍था में आने से पहले दोनों वस्‍तुओं के स्‍पर्शी तलों के मध्‍य लगने वाले घर्षण बल को स्‍थैतिक घर्षण बल कहते हैं। यह स्‍वत: समायोजित बल होता है व आरोपित बल के बढ़ने पर यह बढ़ता है। 2.     सीमान्‍त घर्षण बल (Limiting Frictional Force) - जब वस्तु पर आरोपि...

केपलर के ग्रहीय गति के नियम (kepler's law)

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केपलर के ग्रहीय गति के नियम ·       सभी खगोलीय पिण्‍ड पृथ्‍वी की परिक्रमा करते हैं। ग्रीक खगोलशास्त्रियों ने इस बात का समर्थन किया। पृथ्वी केद्रिंत ब्रह्माण्‍ड के पक्ष में इतना प्रबल विश्‍वास था, ग्रहों द्वारा सूर्य की परिक्रमा करने के सभी प्रमाणों की उपेक्षा कर दी गई। ·       पोलैंड के खगोलशास्‍त्री- कोपर निकस ने 15 वीं शताब्‍दी में यह सुझाया कि सभी ग्रह सूर्य की परिक्रमा करते हैं। 16 वीं शताब्‍दी में गैलीलियो ने अपने खगोलीय प्रेक्षणों के आधार पर कोपरनिकस के विचारों का समर्थन किया। दूसरे यूरोपीय खगोलशास्‍त्री टायको ब्राहे ने ग्रहों की गति के बहुत से प्रेक्षण लिए। इन प्रेक्षणों के आधार पर, उनके सहायक केपलर ने ग्रहीय गति के नियमों को सूत्रबद्ध किया। केपलर के ग्रहों की गति के 03 नियम 1.    सूर्य के चारों ओर ग्रहों का गति-पथ दीर्घवृत्‍ताकार होता है और सूर्य इसके किसी एक फोकस पर विद्यमान होता है। 2.    सूर्य से ग्रह तक खींची गयी रेखा (त्रिज्‍या–सदिश) समान अवधि में समान क्षेत्रफल समाहित करती है। 3.    किसी ...