क्लोनिंग (Cloning)
क्लोनिंग (Cloning)
क्लोन से अभिप्राय केवल एक जनक (माता अथवा पिता) से
प्राप्त प्रतिलिपि से है। ‘क्लोन’
शब्द का अभिप्राय मात्र जीवंत प्राणियों के
संदर्भ में किया जाता है क्योकि मृदु-पेय की कांच की बोतलें यद्यपि पूर्णत: समान
होती हैं फिर भी क्लोन नहीं हैं। अपनी समान आनुवांशिक
संरचना के कारण यह बिल्कुल भेद नहीं दर्शाते। प्रकृति में वे जीव जैसे
सूक्ष्मजीव व पादप जिनमें गैर लैंगिक (Asexual) जनन होता है, क्लोन उत्पन्न करते हैं, इससे
प्राय: ‘नाभिकीय स्थानान्तरण तकनीक’ का प्रयोग किया जाता है।
क्लोन
शब्द सर्वप्रथम J.B.S. हाल्डन द्वारा प्रयुक्त किया गया था।
विश्व में क्लोन
बहुतायत से विद्यमान है। उदाहरणर्थ एक युग्मज का समरूप जुड़वा संतानें क्लोन ही
तो होती हैं। वे अपनी मां के गर्भाशय में एक कोशिका के रूप में विकसित होना शुरू
करते हैं। निषेचित युगमज दो कोशिका में विभाजित होता है व प्रत्येक कोशिका
परिवर्धित होकर समान आनुवंशिक लक्षणों के साथ जुड़वा संतान बनाते हैं। विश्व की
प्रसिद्ध भेड़ ‘डॉली’ (1996) का एक क्लोन रॉसलिन
इन्स्टीट्यूट एडिनबर्ग (स्काटलैण्ड) के वैज्ञानिक डॉ. इयान बिल्मुट द्वारा तैयार किया गया था।
क्लोनिंग अनेक
समरूपी जीवों को उत्पन्न करने की विधि है। डॉली अपनी मां की मात्र एक कोशिका से
उत्पन्न की गई थी। उसका कोई पिता नहीं हैं क्योंकि शुक्राणु की आवश्यकता ही
नहीं हुई। उसके आनुवांशिक लक्षण ठीक वही हैं जो उसकी मां की हैं क्योंकि वह एक जनकीय
संतान है, मानव में परखनली शिशु (Test Tube Baby) तकनीक को ‘इन विट्रो
फर्टिलाइजेशन’ (I.V.F.) कहा
जाता है।
क्लोनिंग के प्रकार:-
सूक्ष्मजीवीं क्लोनिंग
(Micro-Organism Cloning)
कोशिका क्लोनिंग (Cell Cloning)
पादप क्लोनिंग (Plant Cloning)
पशु क्लोनिंग (Animal Cloning)


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