घर्षण बल (Friction Force)

घर्षण बल (Friction Force)

Ø   कोई वस्‍तु जब किसी दूसरी वस्‍तु की सतह पर फिसलती या लुढ़कती है अथवा ऐसा करने का प्रयास करती है तो उनके मध्‍य होने वाली सापेक्षिक गति का विरोध करने वाले बल को घर्षण बल कहते हैं। यह एक संपर्क बल है जो संपर्क में आई सतहों के बीच गति की दिशा के विरूद्ध दिशा में लगता है। इसकी दिशा सदैव वस्‍तु की आपेक्षिक गति की दिशा के विपरीत होती है। वास्‍तव में जब एक वस्‍तु का तल किसी अन्‍य वस्‍तु के तल पर फिसलता है, तो प्रत्‍येक वस्‍तु दूसरी वस्‍तु पर घर्षण बल लगाती है। जो कि वस्‍तुओ के संपर्क-तलों के समांतर होता है।


घर्षण बल के प्रकार :-

1.    स्‍थैतिक घर्षण बल (Static Frictional Force) जब एक वस्‍तु को दूसरी वस्‍तु के तल पर चलाने का प्रयास किया जाता है तो गति की अवस्‍था में आने से पहले दोनों वस्‍तुओं के स्‍पर्शी तलों के मध्‍य लगने वाले घर्षण बल को स्‍थैतिक घर्षण बल कहते हैं। यह स्‍वत: समायोजित बल होता है व आरोपित बल के बढ़ने पर यह बढ़ता है।

2.    सीमान्‍त घर्षण बल (Limiting Frictional Force)- जब वस्तु पर आरोपित बल का मान बढ़ाते है तो स्‍थैतिक घर्षण बल भी बढ़ता जाता है। स्‍थैतिक घर्षण बल के इस अधिकतम मान को सीमांत घर्षण बल कहते है।

3.    गतिज घर्षण बल (Kinetic Frictional Force)- जब एक बार गति प्रारम्‍भ हो जाती है तो तलों के बीच लगने वाला घर्षण बल घट जाता है व एक समान गति बनाये रखने के लिए न्‍यूनतम बल की आवश्‍यकता है, गति के दौरान तलों के बीच लगने वाले घर्षण बल को गतिज घर्षण बल कहते हैं।

   गजिल घर्षण बल दो प्रकार के होते हैं-

a.     लोटनिक (बेल्‍लन) घर्षण बल (Rolling Frictional force)- जब कोई वस्‍तु किसी सतह पर लुढ़कती है तो वस्‍तु तथा सतह के बीच लगने वाला बल लोटनिक घर्षण बल कहलाता है। लोटनिक घर्षण बल स्‍थैतिक या गतिक घर्षण बल की तुमना में नगण्‍य होता है।

b.    सर्पी घर्षण बल (Sliding Frictional force)- जब कोई वस्‍तु किसी सतह पर सरकती है तो सरकने वाली वस्‍तु व उस सतह के बीच लगने वाला घर्षण बल सर्पी घर्षण बल कहलाता है। सर्पी घर्षण बल सदैव लोटनिक घर्षण बल से अधिक होता है।

 


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