निमोनिया (Pneumonia) क्‍या है?

 

निमोनिया (Pneumonia)

फेफड़ों की एक या दोनों थैलियों में जलन पैदा करने वाला संक्रमण. इसमें थैलियों में पानी भी भर सकता है।

निमोनिया में, वायु की थैलियों में द्रव या मवाद भर सकता है. संक्रमण सभी के लिए जानलेवा हो सकता है, लेकिन शिशुओं, बच्चों और 65 वर्ष से अधिक उम्र वाले लोगों को अधिक प्रभावित करता है।

लक्षणों में बलगम या मवाद वाली खांसी, बुखार, ठंड लगना और सांस लेने में कठिनाई शामिल हैं।

एंटीबायोटिक निमोनिया के कई प्रकारों को ठीक कर सकते हैं. निमोनिया के कुछ प्रकारों की रोकथाम टीकों से हो सकती है।


निमोनिया होने के कुछ लक्षण:-

दर्द के प्रकार: सीने में तीक्ष्ण

पूरे शरीर में: बुखार, अच्छा महसूस न करना, चिपचिपी त्वचा, ठंड लगना, थकान, पसीना आना, भूख न लगना, या शरीर में पानी की कमी

सांस संबंधी तंत्र: तेज़ी से सांस लेना, सांस फूलना, सांस लेने में घरघराहट की आवाज़ आना, या हल्की सांस

यह होना भी आम है: खांसी होना या दिल की तेज़ धड़कन

 

हमारे शरीर में सांस लेने के अंग होते हैं फेफड़े (Lungs) फेफड़े स्पंज जैसे अंग होते हैं जिनमें ऑक्सीजन तथा कार्बन डाई आक्साईड का आदान प्रदान होता है। फेफड़ों का अधिकतर भाग छोटे-छोटे गुब्बारेनुमा झिल्लियों का बना रहता है जिन्हें विज्ञान की भाषा में alveoli (वायुकोष्ठ) कहते हैं। ये Alveoli करोड़ों की संख्या में हैं और सामान्यत: हवा से भरी रहती हैं।

जब निमोनिया होता है उस समय किटाणुओं या वायरस के प्रभाव से Alveoli हवा की बजाए गाढे तरल से भर जाती है जो सामान्यत: मवाद हो सकती है या वैसा ही कोई अन्य तरल।

इससे फेफड़े का वो हिस्सा गैस के स्थानांतरण के लायक नहीं रहता। इसके अलावा फेफड़ों की ब्लड-स्पलाई बहुत अधिक होती है। इन किटाणुओं का रक्त के द्वारा शरीर के बाकी हिस्सो में संचार बहुत तेजी से होता है और शरीर बैक्टीरिमिया या स्पटीसिमिया में चला जाता है जिसे आम भाषा में शरीर में जहर फैलना या खून का पानी होना कहते हैं । ये स्थिति बहुत घातक होती है जिससे थोड़ी ही देर में मृत्यु हो सकती है

 

 

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