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धातुएँँ एवं अधातुएँँ ( Metals and Non - Metals)

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धातुएँ ( Metals ) ·        तत्व जो इलेक्ट्रॉन त्यागकर धनायन बनाने की प्रवृति रखते है , ये आवर्त सारणी का अधिकांश स्थान घेरते है । दायें कोनों को छोड़कर सभी तत्व ( s,p,d,f   ब्लाक के तत्व ) धातु है । पूर्व ऐतिहासिक काल में केवल 03 धातुएँ कापर ( Cu )   चाँदी ( Ag ) व सोना ( Au ) ही ज्ञात थी । लेकिन अब ज्ञात धातुओं की   संख्या बढ़ गई है । धातुओ के भौतिक गुण ( Physical Properties of Metals )  1. धातुएँ आघातबर्धन ( बिना टुटे हुए ) है , अर्थात धातुओ को हथौडे से पीट कर उसकी पतली चादरें बनाई जा सकती है । सोना ( Au ) व चादी ( Ag ) सर्वाधिक आघातवर्ध्य होता है ।  2. धातुएँ तन्य ( Ductile ) होती है , अर्थात् धातुओं को पतले तारों मे खींचा जा सकता है ।   3. धातुएँ ऊष्मा व विद्युत की सुचालक ( Good Conductor of Electricity ) है । चाँदी सर्वोत्तम संचालक जबकि सीसा निम्नतम संचालक होता है ।   4. धातुएँ चमकदार है , जिस पर पॉलिश की जा सकती है ।   5. धातुएँ सामान्यतः कठोर होती है ( सोडियम व पोटैशियम को छोड़कर जो मुलायम या मृदु )...

श्वसन की क्रियाविधि ( Methodology of Respiration )

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  श्वसन की क्रियाविधि ( Methodology of Respiration ) ·        ‌जब हम श्वास लेते है तो बाहर की वायु फुफ्फुस कूपिकाओं में प्रवेश करती है , इसे अंतःश्वसन कहते है। वक्षगुहा का फैलाव डायाफ्राम व पसलियों के बीच जुड़ी पेशियों के संकुचन के कारण होता है । ·        ‌इससे वक्ष की पसलियों की उपरिमुखी एवं बहिर्मुखी गति होती है जिसके कारण वक्षगुहा का आयतन बढ़ जाता है । इससे वायु का दबाव कम हो जाता है तथा बाह्य वायु नासाद्वार , श्वास नली एवं श्वसनी द्वार फुफ्फुस में प्रवेश करती है । ·        ‌कूपिका ऑक्सीजन युक्त वायु से पूरित हो जाती है जहां कोशिकाओं में उपर्युक्त मात्रा में रक्त प्रवाहित होता रहता है । कूपिकाओं की पतली भित्ति के माध्यम से रक्त कोशिकाएं गैसों का आदान - प्रदान करती है । ·        ‌ऑक्सीजन विसरण द्वारा कूपिका से रक्त में प्रवेश करता है जहां से इसकी आपूर्ति ऊतकों तक कर दी जाती है । ऊतकों से कार्बन डाईऑक्साइड विसरित होकर रक्त में पहुँचती है जहां वह फुफ्फ...