केपलर के ग्रहीय गति के नियम (kepler's law)
केपलर के ग्रहीय गति के नियम
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सभी खगोलीय पिण्ड पृथ्वी की परिक्रमा करते हैं। ग्रीक
खगोलशास्त्रियों ने इस बात का समर्थन किया। पृथ्वी केद्रिंत ब्रह्माण्ड के पक्ष
में इतना प्रबल विश्वास था, ग्रहों द्वारा सूर्य की परिक्रमा करने के सभी
प्रमाणों की उपेक्षा कर दी गई।
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पोलैंड के खगोलशास्त्री- कोपर निकस ने 15 वीं
शताब्दी में यह सुझाया कि सभी ग्रह सूर्य की परिक्रमा करते हैं। 16 वीं
शताब्दी में गैलीलियो ने अपने खगोलीय प्रेक्षणों के आधार पर कोपरनिकस के
विचारों का समर्थन किया। दूसरे यूरोपीय खगोलशास्त्री टायको ब्राहे ने ग्रहों की
गति के बहुत से प्रेक्षण लिए। इन प्रेक्षणों के आधार पर, उनके सहायक केपलर ने
ग्रहीय गति के नियमों को सूत्रबद्ध किया।
केपलर के ग्रहों की गति के 03 नियम
1. सूर्य के चारों ओर ग्रहों का गति-पथ दीर्घवृत्ताकार होता है और सूर्य इसके किसी एक फोकस पर विद्यमान होता है।
2. सूर्य
से ग्रह तक खींची गयी रेखा (त्रिज्या–सदिश) समान अवधि में समान क्षेत्रफल समाहित
करती है।
3. किसी ग्रह का सूर्य के चारों ओर एक परिक्रमा पूरा करने में लगे समय का वर्ग (परिक्रमण काल का वर्ण), सूर्य से उस ग्रह की औसत दूरी के घन का अनुक्रमानुपाती होता है। यदि परिक्रमण काल को T से दर्शाएं तथा सूर्य से ग्रह की औसत दूरी को r से दर्शाएं, तो । इस नियम की सहायता से न्यूटन यह निष्कर्ष निकालने में सक्षम हुए थे कि सूर्य व ग्रहों के बीच लगने वाला बल के अनुसार परिवर्तित होता है।
इन तीन नियमों की खोज जर्मनी के गणितज्ञ एवं
खगोलविद योहानेस केप्लर (Johannes Kepler 1571–1632) ने की थी। और सौर मंडल के
ग्रहों की गति के लिये वह इनका उपयोग करते थे। वास्तव
में ये नियम किन्ही भी दो आकाशीय पिण्डों की गति का वर्णन करते हैं जो एक-दूसरे का
चक्कर काटते हैं।



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