स्टेम सेल (Stem Cell)
स्टेम सेल (Stem Cell)
स्टेम सेल वे जैविक कोशिकाएँ होती हैं,
जो लगातार विभाजित व विभेदित होकर शरीर को अन्य किसी भी कोशिका या ऊतक में बदलने
की क्षमता रखती है। इन कोशिकाओं को शरीर के विभिन्न अंगों व ऊतकों की मरम्मत के
लिए काम में लाया जा सकता है।
इस पद्धति की शुरूआत 60 के दशक में हुई थी। टोरंटों विश्वविद्यालय के अर्नेस्ट ए मेक्युलाक व जेम्स इटिल ने सबसे पहले सोचा इस क्षेत्र में काम करना शुरू किया था। विभिन्न स्त्रोतों से निम्न 04 प्रकार की स्टेम सेल्स प्राप्त किये जा सकते है।
1. टोटीपोटेंट
स्टेम सेल – ये स्टेम सेल्स सभी प्रकार की कोशिकाओं व ऊतक में विभेदित होने की
क्षमता रखती है। निषेचित अंडा एक प्रकार की
टोटीपोटेंट कोशिका है।
2. प्लूरीपोटेंट
स्टेम सेल – ये कोशिकाएँ प्लेसेंटल या टोटीपोटेंट का कोशिकाओं के अलावा किसी भी
प्रकार की कोशिकाएँ बनती है।
3. मल्टीपोटेंट
स्टेम सेल – ये कोशिकाएँ कुछ विशेष प्रकार के ऊतकों व
कोशिकाओं में भी विभेदित हो सकती है, जैसे अस्थिमज्जा कोशिकाओं से प्राप्त
हीमोपोइटिक स्टेम सेल केवल लाल रूधिराणु व प्लेटलेट्स में ही बदल सकती है।
4. यूनिपोटेंट
स्टेम सेल – ये कोशिकाएँ केवल एक ही प्रकार की कोशिका में बदल सकती है।
प्राप्ति
स्त्रोत के आधार पर स्टेम सेल के 02
प्रकार
A. भ्रूणीय
स्टेम सेल – भ्रूणीय स्टेम सेल प्लूरीपोटेंट प्रकार की कोशिकाएँ होती है। ये
कोशिकाएँ तीन जर्म स्तर बनाने में सूक्ष्म होती है, व 200 से भी अधिक
कोशिकाओं में विभेदित हो सकती है।
·
ये कोशिकाएँ 5-6 दिन के भ्रूण के आंतरिक स्तर से या अम्बलिकल
रक्त से संग्रहीत की जाती है। सीधे भ्रूण से कोशिकाएँ लेने में ब्लास्टोसिस्ट के क्षतिग्रस्त होने की
संभावना रहती है, इसलिए अम्बलिकल रक्त से लगभग 400 स्टेम एकत्रित की जा सकती है।
·
ये कोशिकाएँ बहुत तेजी से द्यिगुणीत हो जाती है।
इसलिए इसका प्रयोग पुन: निर्माण चिकित्सा में किया जाता है। लेकिन वयस्क स्टेम सेल की तुलना इसे किसी विशेष ऊतक में
विभेइीकृत करना कठिन होता है, साथ ही अनियंत्रिक विभाजन होने पर इसमें ट्यूमर निर्माण की प्रवृत्ति भी पाई जाती है।
·
मानव समाज के बहुत से व्यक्ति इसका विरोध कर रहे
है, इस विरोध के पीछे धार्मिक और नैतिक को बताय जा रहा है। धर्मगुरूओं का मानना है
कि वैज्ञानिक इस सृष्टि को चुनौती दे रहे हैं, जो कि गलत है।
B. व्यस्क
स्टेम सेल – ये कम विभेदित व अपेक्षाकृत अवर्गीकृत प्रकार की होती है। जो व्यस्क
मनुष्य से प्राप्त की जाती है। हीमोपोइटिक (अस्थिमज्जा से) व मीसेनकाइमल (अस्थिमज्जा,
दांत की पल्स से) स्टेम सेल इसके उदाहरण है।
·
ये सामान्यत: उसी ऊतक या अंग का निर्माण करती
है, जिससे इसकी प्राप्ति होती है, जैसे हीमोपोइटिक स्टेम सेल का प्रयोग रक्त
कैंसर, थैलीसिमिया, एनिमिया व अन्य रक्त विकारों में होता है।
·
ये कोशिकाएँ ट्यूमर का निम्राण नहीं करती है,
लेकिन इसे भ्रूणीय कोशिकाओं की अपेक्षा कम मात्रा में ही प्राप्त किया जा सकता
है, साथ ही इसका जीवनकाल भी भ्रूणीय स्टेम सेल
से कम होता है।

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