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स्‍टेम सेल (Stem Cell)

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स्‍टेम सेल (Stem Cell) स्‍टेम सेल वे जैविक कोशिकाएँ होती हैं, जो लगातार विभाजित व विभेदित होकर शरीर को अन्‍य किसी भी कोशिका या ऊतक में बदलने की क्षमता रखती है। इन कोशिकाओं को शरीर के विभिन्‍न अंगों व ऊतकों की मरम्‍मत के लिए काम में लाया जा सकता है।       इस पद्धति की शुरूआत 60 के दशक में हुई थी। टोरंटों विश्‍वविद्यालय के अर्नेस्‍ट ए मेक्‍युलाक व जेम्‍स इटिल ने सबसे पहले सोचा इस क्षेत्र में काम करना शुरू किया था। विभिन्‍न स्‍त्रोतों से निम्‍न 04 प्रकार की स्‍टेम सेल्‍स प्राप्‍त किये जा सकते है। 1. टोटीपोटेंट स्‍टेम सेल – ये स्‍टेम सेल्‍स सभी प्रकार की कोशिकाओं व ऊतक में विभेदित होने की क्षमता रखती है। निषे‍चित अंडा एक प्रकार की टोटीपोटेंट कोशिका है। 2. प्‍लूरीपोटेंट स्‍टेम सेल – ये कोशिकाएँ प्‍लेसेंटल या टोटीपोटेंट का कोशिकाओं के अलावा किसी भी प्रकार की कोशिकाएँ बनती है। 3. मल्‍टीपोटेंट स्‍टेम सेल – ये कोशिकाएँ कुछ विशेष प्रकार के ऊतकों व कोशिकाओं में भी विभेदित हो सकती है, जैसे अस्थिमज्‍जा कोशिकाओं से प्राप्‍त हीमोपोइटिक स्‍टेम सेल केवल ल...

घर्षण बल (Friction Force)

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घर्षण बल (Friction Force) Ø    कोई वस्‍तु जब किसी दूसरी वस्‍तु की सतह पर फिसलती या लुढ़कती है अथवा ऐसा करने का प्रयास करती है तो उनके मध्‍य होने वाली सापेक्षिक गति का विरोध करने वाले बल को घर्षण बल कहते हैं। यह एक संपर्क बल है जो संपर्क में आई सतहों के बीच गति की दिशा के विरूद्ध दिशा में लगता है। इसकी दिशा सदैव वस्‍तु की आपेक्षिक गति की दिशा के विपरीत होती है। वास्‍तव में जब एक वस्‍तु का तल किसी अन्‍य वस्‍तु के तल पर फिसलता है, तो प्रत्‍येक वस्‍तु दूसरी वस्‍तु पर घर्षण बल लगाती है। जो कि वस्‍तुओ के संपर्क-तलों के समांतर होता है। घर्षण बल के प्रकार :- 1.     स्‍थैतिक घर्षण बल (Static Frictional Force) – जब एक वस्‍तु को दूसरी वस्‍तु के तल पर चलाने का प्रयास किया जाता है तो गति की अवस्‍था में आने से पहले दोनों वस्‍तुओं के स्‍पर्शी तलों के मध्‍य लगने वाले घर्षण बल को स्‍थैतिक घर्षण बल कहते हैं। यह स्‍वत: समायोजित बल होता है व आरोपित बल के बढ़ने पर यह बढ़ता है। 2.     सीमान्‍त घर्षण बल (Limiting Frictional Force) - जब वस्तु पर आरोपि...

केपलर के ग्रहीय गति के नियम (kepler's law)

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केपलर के ग्रहीय गति के नियम ·       सभी खगोलीय पिण्‍ड पृथ्‍वी की परिक्रमा करते हैं। ग्रीक खगोलशास्त्रियों ने इस बात का समर्थन किया। पृथ्वी केद्रिंत ब्रह्माण्‍ड के पक्ष में इतना प्रबल विश्‍वास था, ग्रहों द्वारा सूर्य की परिक्रमा करने के सभी प्रमाणों की उपेक्षा कर दी गई। ·       पोलैंड के खगोलशास्‍त्री- कोपर निकस ने 15 वीं शताब्‍दी में यह सुझाया कि सभी ग्रह सूर्य की परिक्रमा करते हैं। 16 वीं शताब्‍दी में गैलीलियो ने अपने खगोलीय प्रेक्षणों के आधार पर कोपरनिकस के विचारों का समर्थन किया। दूसरे यूरोपीय खगोलशास्‍त्री टायको ब्राहे ने ग्रहों की गति के बहुत से प्रेक्षण लिए। इन प्रेक्षणों के आधार पर, उनके सहायक केपलर ने ग्रहीय गति के नियमों को सूत्रबद्ध किया। केपलर के ग्रहों की गति के 03 नियम 1.    सूर्य के चारों ओर ग्रहों का गति-पथ दीर्घवृत्‍ताकार होता है और सूर्य इसके किसी एक फोकस पर विद्यमान होता है। 2.    सूर्य से ग्रह तक खींची गयी रेखा (त्रिज्‍या–सदिश) समान अवधि में समान क्षेत्रफल समाहित करती है। 3.    किसी ...

यकृत के कार्य (Funtion of Liver)

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  यकृत (Liver) *      यकृत उदरगुहा में दाहिने ओर डायफ्रॉम से लगा हुआ होता है। मनुष्‍य के शरीर की सबसे बड़ी पाचक ग्रन्थि यकृत है। इसमें पित्‍त रस का निर्माण होता है। जो पित्‍ताशय में संग्रहित हो जाता है। यकृत चॉकलेटी रंग का कोमल द्विपलित अंग होता है। *      एक वयस्‍क मनुष्‍य के यकृत का वजन 1.5-2 किलो ग्राम के लगभग होता है। पुरूषो में यकृत स्त्रियों की अपेक्षा भारी होता है। *      यकृत द्वारा स्‍त्रावित पित्‍त रस आँत में उपस्थित एन्‍जाइम्स की क्रिया को बढ़ा देता है।   यकृत के कार्य (Funtion of Liver) A.     पित्‍त का स्‍त्राव (Secretion of bile): पित्‍त हरे रंग का क्षारीय तरल (PH 8.6) होता है। जिसमें पित्‍त लवण पित्‍त रंग पाए जाते हैं जो वसा के पाचन में कार्य करते हैं। यकृत द्वारा प्रतिदिन लगभग 500-1000 मिली पित्‍त का स्‍त्राव होता है। B.     ग्‍लाइकाजिनेसिस (Glycogenesis):   जब रूधिर में ग्‍लूकोज की मात्रा आवश्‍यकता से अधिक हो जाती है। तब यकृत कोशिकाएँ अतिरिक्‍त ग्...