यकृत के कार्य (Funtion of Liver)

 

यकृत (Liver)

*     यकृत उदरगुहा में दाहिने ओर डायफ्रॉम से लगा हुआ होता है। मनुष्‍य के शरीर की सबसे बड़ी पाचक ग्रन्थि यकृत है। इसमें पित्‍त रस का निर्माण होता है। जो पित्‍ताशय में संग्रहित हो जाता है। यकृत चॉकलेटी रंग का कोमल द्विपलित अंग होता है।

*     एक वयस्‍क मनुष्‍य के यकृत का वजन 1.5-2 किलो ग्राम के लगभग होता है। पुरूषो में यकृत स्त्रियों की अपेक्षा भारी होता है।

*     यकृत द्वारा स्‍त्रावित पित्‍त रस आँत में उपस्थित एन्‍जाइम्स की क्रिया को बढ़ा देता है।

 


यकृत के कार्य (Funtion of Liver)

A.    पित्‍त का स्‍त्राव (Secretion of bile): पित्‍त हरे रंग का क्षारीय तरल (PH 8.6) होता है। जिसमें पित्‍त लवण पित्‍त रंग पाए जाते हैं जो वसा के पाचन में कार्य करते हैं। यकृत द्वारा प्रतिदिन लगभग 500-1000 मिली पित्‍त का स्‍त्राव होता है।

B.    ग्‍लाइकाजिनेसिस (Glycogenesis):  जब रूधिर में ग्‍लूकोज की मात्रा आवश्‍यकता से अधिक हो जाती है। तब यकृत कोशिकाएँ अतिरिक्‍त ग्‍लूकोज का इन्‍सुलिन हार्मोन (Insulin Hormones) की सहायता से ग्‍लाइकोजन (Gltcogen) में बदल देती है। जो कि यकृत तथा पेशियों (Muscles) में संचित हो जाता है, यह क्रिया ग्‍लाइकोजेनेसिस कहलाती है रूधिर में शर्करा की कमी पड़ने पर यह संग्रहित ग्‍लाइकोजन को शर्करा में परिवर्तित करती है।

C.    ग्‍लाइकोजिनोइसिस (Glycogenolysis): रूधिर में जब कभी ग्‍लूकोज की मात्रा कम होती है। तब यकृत कोशिकाओं में संचित ग्‍लाइकोजन पुन: ग्‍लूकोज में बदल देता है। जो कि रूधिर परिवहन में पहुँच जाता है, और रूधिर में ग्‍लूकोज की मात्रा सामान्‍य हो जाती है। इस प्रक्रिया को ग्‍लाइकोजिनालाइसिस कहते हैं यह ग्‍लाइकोजन का यकृत कोशिकाओं द्वारा ग्‍लूकोज से परिवर्तन हैं। जो अग्‍न्‍याशय द्वारा स्‍त्रावित इन्‍सुलिन हार्मोन की सहायता से होता है।

यकृत में आवश्‍यकता से अधिक कार्बोहाइड्रेट तथा शर्करा ग्‍लाइकोजन के रूप में संचित रहते है, तथा शरीर को आवश्‍यकता पडने पर पुन: ग्‍लूकोज में बदल देता है।

D.   ग्‍लूकोनियोजिनेसिस (Gluconcogenesis) : आवश्‍यकता पड़ने पर यकृत कोशिकाएँ (Liver Cells) कार्बोहाइड्रेट के अतिरिक्‍त अन्‍य पदार्थों जैसे- एमीनों अम्‍ल, वसीय अम्‍ल तथा ग्लिसरॉल से भी ग्‍लूकोज का संश्‍लेषण कर लेती है। यह क्रिया ग्‍लूकोनियोजेनेसिस कहलाती है।  

E.     विटामिन का संश्‍लेषण (Synthesisof Vitamin): विटामिन-A का निर्माण कैरोटिन से यकृत द्वारा किया जाता है। यकृत कोशिकाएँ (Carotene) कैरोटिन से विटामिन -A का संश्‍लेषण करती हैं। इसके अतिरिक्‍त विटामिन-A तथा विटामिन-D भी यकृत में संचित रहते हैं।

F.     संचय (Storage) : यकृत में ग्‍लाइकोजन वसा विटामिन (A D) पित्‍त, रूधिर, पानी, लोहा, ताँबा तथा पोटैशियम का संचम होता है।

G.   उत्‍सर्जन (Excretion) : ये यूरिया का संश्‍लेषण करती है। जिसे वृक्‍क रूधिर से लेकर मूत्र के साथ उत्‍सर्जन करते हैं यूरिया के अतिरिक्‍त कुछ अन्‍य निरर्थक पदार्थों के उत्‍सर्जन में यकृत सहायता करता है इस प्रकार प्रोटीन के बिखण्‍डन से प्राप्‍त अमोनिया जो अधिक विषालु  (Highly Toxic) होता है, को यकृत कोशिकाएँ यूरिया (Lesstoxic) में बदल देती है। यह यूरिया मूत्र निर्माण के लिए वृक्‍क (Kidney) में चला जाता है।

H.   मृत RBC’s (यकृत मृतक RBCs) : को नष्‍ट करने का कार्य करता है। मृतक  RBCs यकृत द्वारा पित्‍त कर्णक (बिलरूबिन व बिलब‍र्डिन) में विघटित कर दिये जाते हैं।

I.      हिपैरिन का स्‍त्रा (Secretion of Heparin) : यकृत कोशिकाएँ हिपैरिन नामक प्रोटीन निर्माण व स्‍त्राव करती हैं।


*      ब‍ड़ी आँत में प्रोटीन के प्‍यूट्रीफिकेशन (Putrefication) के समय कुछ विर्षले पदार्थ उत्‍पन्‍न होते है। जो यृकत में पहुँचने के बाद यृकत द्वारा इन्‍हें अविर्षले यौगिकों में बदलकर प्रभावहीन कर दिया जाता है। जो मूत्र (Urine) के द्वारा शरीर के बाहर निकल जाते हैं।

*      यदि यकृत कोशिकाएँ रक्‍त से विलरूबिन नामक पित्‍त वर्णक का अवशोषण बन्‍द कर दे तो रक्‍त में इसकी मात्रा बढ़ जाती है, और पूरा शरीर पीला पड़ने लगता है। इसे पीलिया (Jaundice) रोग कहते है।

*      यकृत में फाइब्रिनेजन एवं प्रोथ्रोम्बिन नामक प्रोटीन का संग्रह व संश्‍लेषण किया जाता है।

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