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प्रकाश का प्रकीर्णन (Scattering of Light)

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  प्रकाश का प्रकीर्णन (Scattering of Light)            1­. टिंडल प्रभाव Ø पृथ्‍वी का वायुमंडल सूक्ष्‍म कणों का एक विषमांगी मिश्रण है। इन कणों में धुआँ , जल की सूक्ष्‍म बूँदें , धूल के निलंबित कण तथा वायु के अणु सम्‍मलित होते हैं। जब कोई प्रकाश किरण पुंज ऐसे महीन कणों से टकराता है तो उस किरण पुंज का मार्ग दिखाई देने लगता है। इन कणों से विसरित प्रकाश परावर्तित होकर हमारे पास तक पहुँचता है। कोलॉइडी कणों द्वारा प्रकाश के प्रकीर्णन की परिघटना टिंडल प्रभाव उत्‍पन्‍न करती है , जब धुएँ से भरे किसी कमरे में किसी सूक्ष्‍म छिद्र से कोई पतला प्रकाश किरण पुंज प्रवेश करता है तो इस परिघटना को देखा जा सकता है। इस प्रकार , प्रकाश का प्रकीर्णन कणों को दृश्‍य बनाता है। जब किसी घने जंगल के वितान (Canopy) से सूर्य का प्रकाश गुजरता है तो टंडल प्रभाव को देखा जा सकता है। जंगल के कुहासे में जल की सूक्ष्‍म बूँदें प्रकाश का प्रकीर्णन कर देती हैं। प्रकीर्णित प्रकाश का वर्ण , प्रकीर्णन करने वाले कणों के साइज पर निर्भर करता है। अत्‍यंत सूक्ष्‍म कण मुख्‍य रूप से नीले प...

बरनौली का सिद्धांत (Bernoulli’s Theorem)

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  बरनौली का सिद्धांत (Bernoulli’s Theorem)   *      जब कोई असंपीड्य व अश्‍यान द्रव एक स्‍थान से दूसरे सथान तक धारा-रेखी प्रवाह में प्रवाहित होता है, तो उसके मार्ग के प्रत्‍येक बिन्‍दु पर इसके प्रति एकांक आयतन की कुल ऊर्जा (दाब ऊर्जा), गतिज ऊर्जा व स्थितिज ऊर्जा का योग एक नियतांक होता है। बरनौली की प्रमेय एक प्रकार से प्रवाहित द्रव (गैस) के लिए ऊर्जा-संरक्षण का सिद्धांत है। *      चिमनी से धुआँ कैसे बाहर आ जाता है ? कार का परिवर्त्‍य शीर्ष तेज चाल में ऊपर को क्‍यों उभर जाता है ? आँधी में आपने अपने छातों को ऊपर की ओर पलटता देखा होगा। इन सभी तथ्‍यों को बरनौली के सिद्धांत के आधार पर समझा जा सकता है। बरनौली का समीकरण *      बरनौली ने एक समीकरण विकसित किया जो कि इस सिद्धांत को मात्रात्‍मक रूप से अभिव्‍यक्‍त करता है। P + 1 / 2 pv 2 + phg = नियतांक *      इस समीकरण के 03 आधार है। 1.     तरल असंपीड्य है जब यह चौड़े मुँह की नली से सं‍करे मुंह की नली में प्रवेश करता है तो इ...

ऊतक (Tissues)

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                     ऊतक (Tissues) क्‍या है ऊतक - को शिकाएँ जो आकृति में एक समान होती है, किसी कार्य को एक साथ सम्‍पन्‍न करती है, वे कोशिकाएँ समूह में एक ऊतक (Tissue) का निर्माण करती है। अत: “कोशिकाओं का ऐसा समूह जिसमें कोशिकाएँ उद्गम आकृति परिवर्द्वन व कार्य की दृष्टि से समान ही ऊतक कहलाता है।”                    Ø सभी जीवित प्राणी या पौधे कोशिकाओं से बने होते है। जीवों में सभी मौलिक कार्य (Fundamental Work) एक ही कोशिका द्वारा किये जाते हैं जैसा कि अमीबा एक कोशिकीय जीव है। इसमें एक ही कोशिका द्वारा गति, भोजन लेने की क्रिया, श्‍वसन, उत्‍सर्जन व कार्य सम्‍पन्‍न की जाती है। Ø बहुकोशिकीय जीवों मे लाखों कोशिकाएँ होती है। इनमें से अधिकतर कोशिकाएँ कुछ ही कार्यों को सम्‍पन्‍न करने   में सक्षम होती है। सभी विशेष कार्य कोशिकाओं के विभिन्‍न समूहो द्वारा किया जाता है। कोशिकाओं के ये समूह एक विशिष्‍ट कार्य को ही अति दक्षता पूर्वक संपन्‍न करने ...

कोशिका(Cell)

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जीवन की मौलिक इकाई : कोशिका (The Fundamental unit of Life : Cell) राबर्ट हुक (Robert Hook) ने सन्‍ 1665 ई. में कोशिका (Cell) की खोज की थी। “अतिसूक्ष्‍म जीवों को छोड़कर सभी जीवधारीयों (पादप व जुतुओं) का शरीर बहुत से छोटे-छोटे कोष्‍ठों का बना होता है। इस कोष्‍ठों को कोशिका (Cell) कहते है।” जीवन-संबंधी सभी क्रियाएँ इन्‍हीं कोशिकाओं के अन्‍दर होती है। अत: कोशिका जीवों की संरचनात्‍मक व क्रियात्‍मक इकाई है। Ø कोशिका शब् ‍ द की उत् ‍ पत्ति लैटिन भाषा के Callula   शब्‍द से हुई है, जिसका अर्थ ‘एक कोष्‍ठ या छोटा कमरा’ है। Ø कोशिका के अध्‍ययन को सायटोलॉजी (Cytology) कहा जाता है। वर्तमान में इसे कोशिका विज्ञान (Cell   Biology) भी कहते है। Ø सभी जीव-जन्‍तु, वनस्‍पति कोशिकाओं से बने हैं। Ø एक कोशिका स्‍वयं में ही एक सम्‍पूर्ण जीव हो सकता है जैसे- अमीबा, पैरामीशियम, कलैमिडोमोनास व बैक्‍टीरिया, इन्‍हें एक कोशिकीय जीव कहते हैं। Ø एक कोशकीय जीव, जैसे कि अमीबा अपने भोजन को अंर्तग्रहण, पाचन, व श्‍वसन, उत्‍सर्जन, वृद्धि व प्रजनन भी करता है बहुकोशिक ज...