श्वसन की क्रियाविधि ( Methodology of Respiration )
श्वसन की क्रियाविधि ( Methodology of Respiration ) · जब हम श्वास लेते है तो बाहर की वायु फुफ्फुस कूपिकाओं में प्रवेश करती है , इसे अंतःश्वसन कहते है। वक्षगुहा का फैलाव डायाफ्राम व पसलियों के बीच जुड़ी पेशियों के संकुचन के कारण होता है । · इससे वक्ष की पसलियों की उपरिमुखी एवं बहिर्मुखी गति होती है जिसके कारण वक्षगुहा का आयतन बढ़ जाता है । इससे वायु का दबाव कम हो जाता है तथा बाह्य वायु नासाद्वार , श्वास नली एवं श्वसनी द्वार फुफ्फुस में प्रवेश करती है । · कूपिका ऑक्सीजन युक्त वायु से पूरित हो जाती है जहां कोशिकाओं में उपर्युक्त मात्रा में रक्त प्रवाहित होता रहता है । कूपिकाओं की पतली भित्ति के माध्यम से रक्त कोशिकाएं गैसों का आदान - प्रदान करती है । · ऑक्सीजन विसरण द्वारा कूपिका से रक्त में प्रवेश करता है जहां से इसकी आपूर्ति ऊतकों तक कर दी जाती है । ऊतकों से कार्बन डाईऑक्साइड विसरित होकर रक्त में पहुँचती है जहां वह फुफ्फ...