संवेग संरक्षण का नियम (Principal of Conservation of Momentum)

 

                 संवेग संरक्षण का नियम

              (Principal of Conservation of Momentum)

यदि दो या दो से अधिक वस्‍तुओं के निकाय पर कोई बाह्य बल आरोपित न हो तो निकाय का संपूर्ण संवेग अपरिवर्तित रहता है। इसे संवेग संरक्षण का नियम कहते है। यह गति के दूसरे नियम के का ही एक निष्‍कर्ष है। गति के‍ नियम के अनुसार किसी निकाय का संवेग-परिवर्तन = बल x समय – अन्‍तराल संवेग-संरक्षण का नियम तथा गति का तृतीय नियम परस्‍पर पर्यायवाची है।

   संवेग संरक्षण नियम के उदाहरण निम्‍न है:-

1. 1.   बंदूक से गोली चलाने पर पीछे की ओर झटका लगना। इसका कारण यह है कि बंदूक का द्रव्‍यमान गोली से अधिक होता है जिससे बंदूक के पीछे हटने का वेग गोली के वेग से बहुत कम होता है।

2.  2.  राकेट का ऊपर जाना भी संवेग संरक्षण नियम पर आधारित है। 

3.  3.  जब बराबर संवेग वाली दो गेदें आपस में टक्‍कर मारती है तो गेंद अचानक रुक जाती है। यहां निकाय (दोनो गेदों) का कुछ संवेग के पूर्व शून्‍य है व टक्‍कर के बाद पुन: शून्‍य हो जाती है व निकाय का कुछ संवेग नियत हो जाता है। 




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