आद्रता (Humidity)

 

               


                              आद्रता (Humidity)

वायुमण्‍डल में उपस्थित जलवाष्‍प की मात्रा को आद्रता (Humidity) कहते है। वायुमण्‍डल में      उपस्थित जलवाष्‍प की मात्रा व दाब के प्रभावों का अध्‍ययन आद्रतामिति कहलाता है।

                              आद्रता से सम्‍बंधित वायुमण्‍डलीय घटनाएँ

1.   ओस (Dew):- अधिक ठण्‍ड होने पर जाड़ों में पत्तियों या घास पर पानी की छोटी-छोटी बूँदें दिखाई देती है, जिसे ओस (Dew) कहते है। दिन में जब वायु का ताप अधिक होता है तो उसमें उपस्थित जलवाष्‍प की मात्रा असंतृप्‍त होती है परंतु रात्रि में जब वायु का ताप गिरने पर उसका कुछ भाग पानी की छोटी-छोटी बूँदों के रूप में पत्तियों व घास पर जमा हो जाता है।



ओस पड़ने के लिए यह आवश्यक है कि आकाश स्वच् हो अर्थात्बादल हों जिससे पृथ्‍वी की ऊष्‍मा विकिरण द्वारा वायुमण्‍डल में चली जाये तथा पृथ्‍वी ठण्‍उी हो जाए। इसके अतिरिक्‍त पृथ्‍वी पर अच्‍छे विकिरण पदार्थों का होना आवश्‍यक है जिससे पृथ्‍वी पर विकिरण तेजी से हो। हवा का चलना भी आवश्‍यक है जिससे वायु अधिक समय तक ठण्‍डे पदार्थ के संपर्क में रहती है और शीघ्र संतृप्‍त होगी। बहुत अधिक ठण्‍डे होने पर जब पृथ्‍वी के आस-पास वायु का ताप 0°C तक गिर जाता है जलवाष्‍प पेड़ों की पत्तियों पर बर्फ के छोटे-छोटे टुकड़ों के रूप में जम जाती है, इसे पाला (Frost) कहते है। इससे पौधों की कोशिकाओं में जल जम जाता है तथा यह नष्‍ट हो जाता है।  

2.   ओला (Hailstone):- जब वर्षा के पानी की बूँदें वायुमण्‍डल के उस भाग से गुजरती है जहाँ का ताप 0°C के भी कम है तो ये बूँदें जम कर छोटे-छोटे बर्फ के कण बनाती है, यही छोटे-छोटे बर्फ के कण आकार बड़ा होने पर पृथ्‍वी पर गिरने लगते हैं, इन्‍हें ओला कहते हैं।



3.   बादल वर्षा (Clouds and Rain):- गर्मी के समय जल नदियों समुद्र से वाष् बनकर उड़ जाता है, वाष्‍पयुक्‍त वायु का घनत्‍व कम होने से यह ऊपर उठती है परंतु ऊपर दाब कम होने से इस जलवाष्‍पयुक्‍त वायु का आयतन बढ़ने से यह ठण्‍डी हो जाती है। इस क्रिया में जब वायु जलवाष्‍प कणों से संतृप्‍त हो जाती है तो छोटी-छोटी बूँदों से परिवर्तित होती है। इन बूँदों का समूह वायुमण्‍डल के ऊपरी भाग में इधर-ऊधर तैरता है, इन्‍हें बादल कहते है।


जब यह बादल पहाड़ से टकरा कर ऊपर उठते है तो इनके ताप में और कमी आने से संघनन क्रिया तेजी से होती है, बूँदों का आकर भी बढ़ता है तथा यही बूँदें अपने भार के कारण वर्षा के रूप में नीचे गिरती हैं। 

4.  कोहरा या कुहासा (Fog or Mist):- जाड़ों में जब वायुमण्‍डल का ताप गिर जाता है ऊपर की वायु ठण्‍डी होकर संतृपत हो जाती है तथा यह जलवाष्‍प धूल के कणों, धुएँ के कणों आदि पर संघनित होकर छोटी-छोटी बूँदों में परिवर्तित होती है तथा इन छोटी-दोटी जल की बूँदों के पृथ्‍वी तल के पास एकत्र होने से वायुमण्‍डल धुँधला दिखाई देता है, इसे कोहरा कहते हैं।


जिस दिन कोहरा होता है गर्मी अधिक पड़ती है। धूप निकलने पर वायु का तापबढ़ने से कोहरे की बूँदें वाष्पित होकर वायु में मिलने लगती है तथा धीरे-धीरे कोहरा समाप्‍त हो जाता है।

 

 

 

 

 

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