एन्जाइम (Enzymes)
एन्जाइम (Enzymes)
एन्जाइम:-
सामान्य रासायनिक क्रियाएँ जो जीवित कोशिकाओं के बाहर होती
हैं, वे उच्च तापक्रम पर एवं बहुत धीमी गति से होती है। किन्तु जीवित कोशिकाओं
के अन्दर होने वाली जीव-रासायनिक क्रियाएँ उन्हीं परिस्थितियों में शरीर के
सामान्य तापमान पर अधिक गति से होती है। कोशिकाओं में होने वाली इन क्रियाओं की
तेज गति के लिए विशिष्ट पदार्थ होते हैं। जिन्हें विकर
या प्रकिण्व (enzyme) कहते है। ये एन्जाइम इन
रासायनिक क्रियाओं के जैविक उत्प्रेरकों (catalyst) को एन्जाइम कहते हैं।
ऐतिहासिक
पृष्ठभूमि:-
जैविक-क्रियाओं में उत्प्रेरकों की भूमिका की
जानकारी सबसे पहले सन् 1800 ई. के आसपास मिली। यह जानकारी मांस पाचन हेतुअ आवश्यक
स्त्रावों का आमाशय द्वारा निर्माण एवं लार द्वारा स्टार्च के सरल शर्कराओं से
परिवर्तित होने जैसी घटनाओं से आरम्भ हुई सन् 1850 ई. में लुई पाश्चर ने बतलाया कि यीस्ट द्वारा शर्कराओं
के फर्मेन्टेशन से, एल्कोहल बनने की क्रिया में फर्मेन्ट्स (ferments) आवश्यक होते हैं जो उत्प्रेरक
का काम करते हैं। इन्हीं फर्मेन्ट्स का नामकरण बाद में कुहने ने 1878 में एन्जाइम किया। पाश्चर के अनुसार
इन पदार्थों को कोशिकाओं से अलग नहीं किया जा सकता था। किन्तु सन् 1897 में
वैज्ञानिक एडवर्ड बुशनर (Edward Buchener) ने पहली बार यीस्ट से उन प्रकिण्वों अर्थात् एन्जाइमों
को अलग किया जो शर्करा को एल्कोहल में फर्मन्ट करने में सहायक होते थे। उन्होने
यह भी बतलाया कि कोशिका के बाहर निकालने अर्थात्
कोशिका से पृथक् करने पर भी वे एन्जाइइम के रुप में क्रिया कर सकते हैं।
सन् 1926 में तो जेम्स सम्नर (James Sumner) ने यूरिए एन्जाइम को शुद्ध
रवों के रूप में भी प्राप्त कर लिया। इस उपलब्धि के लिए उनहें सन् 1947 में नोबेल
पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। इन रवों का अध्ययन करने पर विदित हुआ कि वे
विशुद्ध रूप से प्रोटीन अणु हैं। बाद में अन्य एन्जा़इमों के अध्ययन से स्पष्ट
हुआ कि सभी एन्जाइम प्रोटीन होते हैं।
आज की स्थिति है कि लगभग 2000 प्रकार के एन्जाइमों की पहचान हो चुकी है
जिसमें से प्रत्येक विभिनन् रासायनिक क्रियाओं के लिये उत्प्रेरक का काम करता
है। इन 2000 एनजाइम में से अनेकों को रवों के रुप में भी प्राप्त कर किया है।


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